मैं, श्रेया, भक्ति, अनुभव और आत्मचिंतन से प्रेरित होकर लिखती हूँ। मेरी कविताएँ किसी सिद्धांत को स्थापित करने के लिए नहीं, बल्कि हृदय में उठते सच्चे भावों को जैसा-का-तैसा रखने का प्रयास हैं। मेरा लेखन अनुभव, भक्ति और आत्मचिंतन के बीच, एक सहज संवाद है।