इस संग्रह को पढ़ कर आपको ये महसूस होगा कि हर कविता अधूरी है पर ऐसा ज़रूरी नहीं है। सब कुछ पाठकों की इच्छाशक्ति पर निर्भर करता है। ऐसा स्वतः हो गया है कि जानबूझकर, इसका अनुमान मैं स्वयं नहीं लगा पा रहा हूँ।अधूरा है मन......
प्रतीक एक नवोदित लेखक हैं जिनकी कविताएँ जीवन के अनुभवों, भावनाओं और रोज़मर्रा की छोटी-छोटी बातों में छिपे अर्थों को उजागर करती हैं। उनकी लेखनी में सादगी के साथ गहराई मिलती है, और हर पंक्ति पाठकों को अपने भीतर झांकने का अवसर देती है।