लेखक का प्रयास जीवन को अनुभव, निरीक्षण और आत्म-साक्ष्य के माध्यम से समझने का हैं। ये कविताएँ कल्पना से अधिक अनुभवों की सच्चाई से उपजी हैं- जहाँ समाज, रिश्ते, संघर्ष और आत्मचेतना एक साथ उपस्थित हैं। फलतः लेखक जीवन के सफर में आये इसी खट्टे - मीठे "" ताना - बाना"" को अपनी कविता संग्रह का नाम देते हुए संकेत करते हैं की यह संग्रह कोई भावनात्मक उच्छ्वास नहीं, बल्कि आंतरिक अनुशासन की अभिव्यक्ति हैं। लेखन करना उनके लिए स्वयं को देखने की प्रक्रिया है- निष्कर्ष निकालने से अधिक सजग होकर ठहरने का अभ्यास। कवि द्वारा लिखित कविताएँ पाठक को उत्तर नहीं देतीं, बल्कि स्वयं से प्रश्न करने का साहस प्रदान करती हैं।